💃 शादी के सात फेरो के सातों वचन अर्थ सहित सभी वचनों का मतलब जाने | Shadi Ke Saat Phero Ke Saato Vachan Hindi

Shadi Ke Saat Phero Ke Saato Vachan: हिन्दू धर्म मे जब किसी लड़के या लड़की का शादी विवाह करवाया जाता है तब वहाँ पर वर और वधू को शादी के सात वचन (Shadi ke Saat Vachan) पण्डित जी के द्वारा दिलवाया जाता है। shadi ke saat vachan पूर्ण होने के बाद दोनों अजनवी वर-वधू के रूप मे सात जन्मो तक एक हो जाते है।

शादी के सात फेरों के सात वचन (Shadi Ke Saat Phero Ke Saato Vachan) क्या हैं जो पण्डित जी अग्नि को साक्षी मान कर वर-वधू को सात फेरों को दिलवाते समय बोलते है। बताएगे आपको सम्पूर्ण जानकारी शादी के सात फेरो से संबन्धित उसके लिए आपको यह पोस्ट ध्यानपूर्वक शुरू से लेकर अन्तिम तक पड़ना होगा।

Shadi ke Saat Vachan in Hindi

Shadi Ke Saat Vachan: अगर आपकी शादी हो गयी है तब तो आपको शादी के सात वचन (Saat Phero Ke Saato Vachan) क्या है? यह पता होगा अगर भूल गए है तो आज इस आर्टिकल के माध्यम से आपको शादी के सात फेरो (Shadi ke Saat Phero) का क्या मतलब है यह जानकारी तो देंगे ही और साथ ही साथ शादी के सात फेरों का क्या महत्व होता है एक शादीसुदा इंसान के जीवन मे यह भी जानने को मिलेगा।

विवाह एक ऐसा पवित्र बंधन होता है जिसे किसी की नजर न लगे तो इंसान बहुत ही सुखमय जीवन व्यतीत करता है। और विवाह के वक्त लिए गए सात फेरो के सातों वचन का निर्वाह करते हुये इंसान हंसी खुसी दुनिया के सभी रिश्तो को कुशल पूर्वक निभाते हुये अपना जीवन जीता है।

Shadi Ke Saat Phero Ke Saato Vachan

विवाह (Marriage) जीवन का बेहद महत्वपूर्ण और रोचक हिस्सा होता है। शादी के बाद जब एक लड़की अपना घर परिवार व माता पिता को छोड़कर एक नए परिवार में अपने पति के संग जाती है तो वह वहां के नियमों, संस्कारों को अपनाती है। उस लड़की के लिए यह सब कुछ नया होता है। इस परिवार में लड़की को सम्मान जनक स्थान दिलाने और नव विवाहित वर और वधू को उनकी नई जिंदगी के कर्तव्यों का बोध कराने के लिए विवाह के वक्त अग्नि के फेरे लेते समय सात वचन दिलाए जाते हैं।

ये सात वचन कन्या अपने वर से मांगती है। शादी के सात वचन (Shadi ke Saat Vachan) वर और वधू दोनों को एक दूसरे के अधिकारों, अहमियत और कर्तव्य के बारे में बताते हैं। शादी के तीन फेरों में वधू वर से आगे रहती है और चार फेरों में वो वर के पीछे चलते हुए वचन मांगती है।

शादी के सात वचन (Shadi Ke Saato Vachan) पूर्ण होने बाद ही ये रिश्ता बनता है और दो लोग एक दूसरे के सुख दुख के जीवन साथी बन जाते हैं। आइए अब जानते हैं कि वो सात वचन कौन कौन से हैं जो शादी के सात फेरे के समय सात वचन पण्डित जी द्वारा दिलवाया जाता है।

शादी के सात फेरो के सातों वचन | Shadi ke Saat Phero ke Saato Vachan

विवाह के समय वर और वधू सात फेरे के साथ सात वचन भी लेते हैं। हर फेरे का एक वचन होता है जिसे वर-वधू जीवन भर साथ मिलकर निभाने का वादा करते हैं। लड़की विवाह के बाद लड़के के बाई ओर बैठने से पहले सात वचन लेती है।

नीचे हम आपको सात संस्कृत मंत्र वचन और उसका सरल हिंदी अनुवाद बताने जा रहे हैं। पंडित जी की उपस्थिति में यह मंत्र उच्चारण के साथ अग्नि के सात फेरे लेकर व ध्रुव तारा को साक्षी मान कर दो व्यक्ति तन-मन और आत्मा के साथ एक पवित्र बंधन में बंध जाते हैं।

1. पहला वचन

तीर्थव्रतोद्यापन यज्ञकर्म मया सहैव प्रियवयं कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति वाक्यं प्रथमं कुमारी !!

पहले वचन का हिन्दी अनुवाद

पहले वचन मे कन्या वर से पहला वचन मांगती है कि यदि आप कभी तीर्थयात्रा करने जाएं तो मुझे भी अपने संग लेकर जाइएगा। यदि आप कोई व्रत-उपवास अथवा अन्य धार्मिक कार्य करें तो आज की भांति ही मुझे अपने वाम भाग (बांई ओर) में बैठाइयेगा। यदि आप इसे स्वीकार करते हो तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।

2. दूसरा वचन

पुज्यौ यथा स्वौ पितरौ ममापि तथेशभक्तो निजकर्म कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं द्वितीयम !!

दूसरे वचन का हिन्दी अनुवाद

वर से दूसरा वचन वधू लेती है कि जिस तरह से मै अपने माता-पिता का सम्मान करती आयी हूं, उसी तरह से आपके माता-पिता और परिजनों का सम्मान करूंगी। घर की मर्यादा का ध्यान रखूंगी। लेकिन मेरी ही तरह आप भी मेरे माता-पिता का सम्मान करेंगे और घर परिवार को अपना मानेंगे तो मैं आपके वामांग मे आना पसंद करूंगी।

3. तीसरा वचन

जीवनम अवस्थात्रये मम पालनां कुर्यात,

वामांगंयामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं तृ्तीयं !!

तीसरे वचन का हिन्दी अनुवाद

तीसरे फेरे में वधू वर से ये वचन लेती है कि मैं जीवन की तीनों अवस्थाओं (युवावस्था, प्रौढ़ावस्था और वृद्धावस्था) में आपका साथ निभाउंगी अगर आप भी मुझे ऐसा वचन देते हैं, तो मैं आपके वामांग आना चाहूंगी।

4. चौथा वचन

कुटुम्बसंपालनसर्वकार्य कर्तु प्रतिज्ञां यदि कातं कुर्या:,

वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं चतुर्थं !!

चौथे वचन का हिन्दी अनुवाद

शादी के तीन वचन पति से लेने के बाद चौथे वचन में वर आगे आता है, इसके बाद वधू अपने  पति से वचन मांगते हुए कहती है कि अब तक आप घर-परिवार की चिंता से मुक्त थे। विवाह के बाद परिवार की जरूरतों को पूरा करने का दायित्व आप पर होगा। अगर आप इसे निभाने को तैयार हैं, तो मैं आपके वामांग में आना चाहूंगी।

5. पंचवा वचन

स्वसद्यकार्ये व्यवहारकर्मण्ये व्यये मामापि मन्त्रयेथा,

वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: पंचमत्र कन्या !!

पांचवे वचन का हिन्दी अनुवाद

पांचवें वचन में कन्या कहती है कि अपने घर के कार्यों में, विवाह आदि मे लेन-देन अथवा अन्य किसी कार्य हेतु खर्च करते समय यदि आप मेरी भी राय लिया करेंगे तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।

6. छठा वचन

न मेपमानमं सविधे सखीनां द्यूतं न वा दुर्व्यसनं भंजश्चेत,

वामाम्गमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं च षष्ठम !!

छठे वचन का हिन्दी अनुवाद

छठे वचन में कन्या कहती है कि यदि मै कभी अपनी सहेलियों या अन्य महिलाओं के साथ बैठी रहूँ तो आप किसी के सामने किसी भी कारण से मेरा अपमान नहीं करेंगे। इसी प्रकार यदि आप जुआ अथवा अन्य किसी भी प्रकार की सामाजिक बुराइयों को अपने आप से दूर रखें तो ही मै आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।

7. सातवाँ वचन

परस्त्रियं मातृसमां समीक्ष्य स्नेहं सदा चेन्मयि कान्त कुर्या,

वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: सप्तममत्र कन्या !!

सतवे वचन का हिन्दी अनुवाद

आखिरी या सातवें वचन के रूप में कन्या ये वर मांगती है कि आप पराई स्त्रियों को मां समान समझेंगें और पति-पत्नि के आपसी प्रेम के मध्य अन्य किसी को भागीदार नही बनाएंगें। यदि आप यह वचन मुझे दें तो ही मै आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ।

हिन्दू धर्म में शादी का अर्थ और  महत्व – Shadi ka mahatva hindi

हिन्दू शादी की परंपरा ये मानती है कि पति और पत्नी के बीच जन्म-जन्मांतरों का सम्बंध होता है जिसे किसी भी परिस्थिति में नहीं तोड़ा जा सकता है।

विवाह का शाब्दिक अर्थ है

वि + वाह = विवाह अर्थात उत्तरदायित्व का वहन करना या जिम्मेदारी उठाना।

भारत में सनातनी और वैदिक संस्कृति के अनुसार हिन्दू धर्म मे 16 संस्कारों का बड़ा महत्व होता है और विवाह संस्कार उन्हीं में से एक होता है। पाणिग्रहण संस्कार को ही सामान्यतः विवाह के नाम से जाना जाता है।

भारत मे पति और पत्नी के बीच संबंध को शारीरिक संबंध (Physical Relationship) से अधिक आत्माओं का संबंध माना जाता है। विवाह की रस्मों में सात फेरों का भी बहुत बड़ा महत्व होता है जिसके बाद ही विवाह संपूर्ण माना जाता है।

विवाह के वक्त सात फेरों में दूल्हा व दुल्हन दोनों से सात वचन दिलवाये जाते हैं। वर-वधू अग्नि को साक्षी मानकर उसके चारों ओर घूमकर पति-पत्नी के रूप में एक साथ सुख से जीवन बिताने के लिए प्रतिज्ञा करते हैं जिसे सप्तपदी भी कहा जाता है।

हमे पूरा भरोसा है कि आपको यह पोस्ट Shadi ke Saat Phero ke Saato Vachan जरूर पसंद आया होगा। हम हमेशा से यह कोशिश करते रहते है कि हम आपके लिए अच्छा से अच्छा Content लेकर आए। हम आशा करते हैं कि अब आपको Shadi ke Saat Phero ke Saato Vachan से संबन्धित सभी जानकारी मिल गयी होगी।

अगर आपके पास “Saat Phero ke Saato Vachan” आर्टिकल से संबन्धित कोई सुझाव व सवाल है तो आप हमे नीचे कमेंट के माध्यम से बता/पूंछ सकते है। यदि आपको आज की यह पोस्ट पसन्द आई है तो आप अपने Friends के साथ इस आर्टिकल को सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करे।

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